विष्णु खरे स्मृति सम्मान : संस्तुतियाँ आमंत्रित हैं.

9/24/2020




२०२१

का

विष्णु खरे स्मृति सम्मान

 

आलोचना और अनुवाद के क्षेत्रों  (साहित्य-समालोचना, सिने-आलोचना, कविता-अनुवाद, कहानी-अनुवाद, विशिष्ट लेखों के अनुवाद) में दिए जाएंगे, जो पिछले तीन वर्षों (सन् २०१८/१९/२० तक) में प्रकाशित हुईं हों.

 

 

 

 

कृपया संस्तुतियाँ टिप्पणी में लिखें


 संस्तुतियों का आरूप

१. अनुशंसा की विधा : (आलोचना/ अनुवाद)

२. रचनाकार का नाम :

३. रचनाकार के रचना प्रकाशित होते समय उम्र चालीस से कम है ? : (हाँ/नहीं)

४. रचना का नाम :

५. रचना के प्रकाशन सम्बन्धी सूचना - पत्रिका का अंक, या वेब पत्रिका का लिंक :

६. अधिकतम एक हजार शब्दों में अनुशंसा - (सत्य, स्वातन्त्र्य, मूल्यबोध के आयामों पर रचना/आलेख/अनुवाद किस तरह खरी उतर रही है)

अधिक जानकारी के लिए समालोचन वेब पत्रिका देखें।  

प्रविष्टियाँ भेजने की अंतिम तिथि : १५ दिसम्बर २०२०

समालोचन पर संस्तुतियाँ टिप्पणी करें या ई मेल करें :

 

 

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2 comments:

अनाम at: 26 अक्तूबर 2020 को 9:15 pm ने कहा…

१. अनुशंसा की विधा : अनुवाद

२. रचनाकार का नाम : कुर्रतुल-ऐन-ताहिरा/ अनुवाद और प्रस्तुति : सदफ़ नाज़

३. रचनाकार के रचना प्रकाशित होते समय उम्र चालीस से कम है ? : हाँ

४. रचना का नाम : नुक़्ता ब नुक़्ता

५. रचना के प्रकाशन सम्बन्धी सूचना : सदानीरा, वसन्त २०१८, https://www.sadaneera.com/nuqta-b-nuqta-ghazal-of-iranian-poet-qurrat-ul-ain-tahirih-in-hindi-translation-by-sadaf-naaz/

६. अनुशंसा :

यह मूल रचना प्रसिद्ध ईरानी ग़ज़ल है। ईरानी कवयित्री कुर्रतुल-ऐन-ताहिरा (1817-1852) बाबी मत से जुड़ी हुई थीं। इस्लाम से अलग मत रखने के कारण उन्हें फांसी दे दी गई थी। स्त्रियों की शिक्षा और अधिकारों के लिए वह आजीवन संघर्ष करती रहीं।

मूल रचनाकार के जीवन का संघर्ष सत्य और स्वातन्त्र्य को परिलक्षित करता है। इस ग़ज़ल के अनुवाद में सदफ़ नाज़ ने मूल फारसी पाठ के बहुत करीब लय रखने की कोशिश की है। उनका स्वातन्त्र्य हिन्दुस्तानी ज़बान को समृद्ध करने का उपक्रम है, जिसमें फारसी और उर्दू लफ्ज़ों की बहुतायत है। साथ ही यह रचना प्रेम और विरह के मूल्यों को उजागर करने में सक्षम है। इसमें तमाम रूपकों और उपमाओं का समन्वय है।

अनाम at: 26 अक्तूबर 2020 को 9:29 pm ने कहा…


१. अनुशंसा की विधा : अनुवाद

२. रचनाकार का नाम : कुर्रतुल-ऐन-ताहिरा/ अनुवाद और प्रस्तुति : सदफ़ नाज़

३. रचनाकार के रचना प्रकाशित होते समय उम्र चालीस से कम है ? : हाँ

४. रचना का नाम : नुक़्ता ब नुक़्ता

५. रचना के प्रकाशन सम्बन्धी सूचना : सदानीरा, वसन्त २०१८, https://www.sadaneera.com/nuqta-b-nuqta-ghazal-of-iranian-poet-qurrat-ul-ain-tahirih-in-hindi-translation-by-sadaf-naaz/

६. अनुशंसा :

यह मूल रचना प्रसिद्ध ईरानी ग़ज़ल है। ईरानी कवयित्री कुर्रतुल-ऐन-ताहिरा (1817-1852) बाबी मत से जुड़ी हुई थीं। इस्लाम से अलग मत रखने के कारण उन्हें फांसी दे दी गई थी। स्त्रियों की शिक्षा और अधिकारों के लिए वह आजीवन संघर्ष करती रहीं।

मूल रचनाकार के जीवन का संघर्ष सत्य और स्वातन्त्र्य को परिलक्षित करता है। इस ग़ज़ल के अनुवाद में सदफ़ नाज़ ने मूल फारसी पाठ के बहुत करीब लय रखने की कोशिश की है। उनका स्वातन्त्र्य हिन्दुस्तानी ज़बान को समृद्ध करने का उपक्रम है, जिसमें फारसी और उर्दू लफ्ज़ों की बहुतायत है। साथ ही यह रचना प्रेम और विरह के मूल्यों को उजागर करने में सक्षम है। इसमें तमाम रूपकों और उपमाओं का समन्वय है।

संस्तुतिकर्ता : प्रचण्ड प्रवीर

 

2021 : विष्णु खरे स्मृति सम्मान : आलोचना और अनुवाद

2021 में यह सम्मान आलोचना और अनुवाद के क्षेत्र मे 2018 , 19 , 20 तक प्रकाशित रचनाओं को प्रदान किया जाएगा.