राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान में कविता

9/21/2012


राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान :: एक दस्तक, एक खोज


दिनांक १५ सितम्बर 

ग्लोब पर कौन-कहाँ लीक से हटकर कुछ नया कर जाएगा..ऐसी राह छोड़ेगा कि उस पर चलकर हर बार विस्मय से आपके होंठ दबे होंगे, कहा नहीं जा सकता. हाँ, यदि यह दस्तक आप समय पर नहीं सुन पाते तो यह व्यर्थ हो जाती है; ठीक उसी तरह जैसे एक पाइप जो पानी को दूर तक ले जाता है,प्यासे खेतों को महका देता है; यदि उसमें कई छेद हो जाएँ,तो भारी ऊर्जा का संवाहक,जीवन का यह संवाहक- बेकार सिद्ध होगा. तो हमें इस नवाचार को पहचानना है..इसमें छिपी प्रयोगधर्मिता का स्वागत करना है.



यहाँ अहमदाबाद में रहते सत्रह वर्ष हुए.. पर इस दस्तक को कैसे नहीं सुन सकी जो बिलकुल कुछ ही फासले पर बराबर आहट दे रही थी..बल्कि अपने होने को बताती सुलग रही थी..ऐसे,जैसे एक मशाल किसी पुराने अँधेरे में हस्तक्षेप करती है और इसी पुराने से कितने ही चरागान-ए-गुल खिलते हैं. 





१५  सितम्बर,  की सुबह  अमहदाबाद आये अपने अतिथि कवियों -सुमन केशरी, अरुण देव, महेश वर्मा, और सईद अयूब के साथ शहर के शोर में  अपनी अलग पहचान बनाते राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान में आयोजित एक काव्य-पाठ में शिरकत करने का अवसर मिला. सुमन केशरी जी और विपिन जी के कारण यह संभव हो सका था. यह एक नया अनुभव था, कुछ इसलिए भी अलग था क्योंकि एक तो हम सब अपनी नयी पीढ़ी के सामने थे, और नयी पीढ़ी भी वह जो हनी-बी दर्शन पर नए तरह का काम कर रही है..और दूसरे हम सभी चाहे वह लेखक हो,अकादमिक इकाई हो,शोधार्थी हो, किसान या दस्तकार हो, नीति-निर्धारक उद्यमी या प्रवर्तक हो.. एक ही तरह की सर्जना से संचालित हैं, जो अदृश्य रूप से मधुमक्खी संजाल के तर्क और संवाद दर्शन से अनुप्राणित है...और जहाँ निरंतर नए की खोज ज़ारी है और विचारों को जगह मिलने की पूरी संभावनाएं हैं एवं  पुराने का पुनर्स्थापन नूतन सन्दर्भों में हो रहा  है. 


इस तरह हम सब एक गोल्डन ट्राईएंगल के बीच थे जिसका एक कोण नवप्रवर्तन है, दूसरा कोण इसी का विस्तार 'उद्यम' है और जो एक ख़ास तरह के कोण निवेश के साथ अपनी ख़ास पहचान बनाता है. NIF (राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान) Grassroots innovations Augmentation Networks के तहत कार्य करती है जिसका उद्देश्य जनसाधारण से मूलभूत रूप में उस प्रतिभा को खोज निकालना है जो तकनीक एवं व्यावसायिक उत्कृष्टता का परिचायक ही न हो बल्कि देश की उन्नति में सक्रीय रूप से अपना योगदान दे सके. इस हेतु राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान हनी बी दर्शन पर अपना कार्य कर रहा है. इसके संस्थापक अहमदाबाद में प्रोफ़ेसर अनिल कुमार गुप्ता (भारतीय प्रबंध संस्थान) हैं और ३८ वर्षीय विपिन इसके प्रबंधक.



१५ सितम्बर की सुबह NIF के प्रांगण में पुष्पगुच्छ से अतिथि कवियों का स्वागत करते हुए. काव्य पाठ आरम्भ हुआ. अरुण देव और महेश वर्मा ने कविताओं के पूर्व बीज वक्तव्य दिया, जो संस्थान के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी रहा. सुमन केशरी जी की कविताएँ उद्वेलित करने वाली थीं. सईद ने अपनी एक नज़्म पढ़ी जिसकी सभी ने सराहना की. वहीँ के एक विद्यार्थी राहुल ने पूरे जोश से कुछ कविताएँ पढ़ीं..उनकी ताजगी निश्चित रूप से वसंत के आगमन जैसी लग रही थी. 


काव्य-पाठ के साथ संस्थान को करीब से जानने का सुअवसर मिला. यह संस्थान प्रयोगधर्मी अन्वेषक तथा पारंपरिक ज्ञान संपन्न लोगों की आवाज़ है जिसका मिशन सीखना, सृजन करना, तलाशना और सद्भाव के साथ दूसरों में बांटना है.

हनी बी नेटवर्क गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए एक ऐसी निर्मात्री श्रृंखला है जो भारत में अहमदाबाद, जयपुर , मदुरई (तमिलनाडु),

तुमकुर (कर्नाटक), और जम्मू-कश्मीर में सक्रीय है. लेखक वर्ग भी इस संजाल से जुड़े, इस शुभकामना के साथ ..













अपर्णा मनोज 
 

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